हम सहते रहे वो सताते रहे,
हम सुनते रहे वो सुनाते रहे।
हम सुनते रहे वो सुनाते रहे।
गम तो बहुत थे जिन्दगी में मगर
देख कर सूरत उनकी हम वादा निभाते रहे।।
हर बार नयी थी बातें उनकी,
हर बार वही थीं जज़्बातें उनकी।
वो हमें मूर्ख समझ कर बहलाते रहे,
हम इसे देश की तरक्की मान कर अपनाते रहे।।
हर बार वही थीं जज़्बातें उनकी।
वो हमें मूर्ख समझ कर बहलाते रहे,
हम इसे देश की तरक्की मान कर अपनाते रहे।।
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