Sunday, 20 September 2015

गांधी याद आ रहे हैं

                                                              गांधी याद आ रहे है...

  भूला नहीं हूं मै अभी तक,
  आपका पिछला वादा।
  आए हो फिर द्वार हमारे,
  बता दो अपना इरादा।।

  हो गए मशगूल आप तो,
  कुर्सी को हथियाने में।
  वो भी बाहर ऐश कर रहा,
  जिसको होना चाहिए थाने में।।

  नाम तुम्हारा अंकित है अब,
  देश के रखवालों  में।
  तुम अभियान चलाते रह गए,
  नदियां मिल गई नालों में।।

  शिलान्यास तो बहुत किया,
  अब तो तुम कुछ काम करो।
  तुमसे जनता की उम्मीद जुड़ी है,
  इसका तो कुछ मान करो।।

  देश के विकास पर अब तो,
  काले बादल छा रहे है।
  वक्त के इस हालात से हमें,
  गांधी याद आ रहे हैं।

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